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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Jun 2022

    फ़र्ज़ करो हम अहले वफ़ा हों!

    फ़र्ज़ करो हम अहले वफ़ा हों, फ़र्ज़ करो दीवाने हों,फ़र्ज़ करो ये दोनों बातें झूठी हों अफ़साने हों| इब्ने इंशा

  • 1st Jun 2022

    हमें हाँ याद रहेगा!

    हम भूल सकें हैं न तुझे भूल सकेंगे,तू याद रहेगा हमें हाँ याद रहेगा| इब्ने इंशा

  • 1st Jun 2022

    जिनमें बयाँ याद रहेगा!

    कुछ मीर के अबियत थे, कुछ फ़ैज़ के मिसरे,एक दर्द का था जिनमें बयाँ याद रहेगा| इब्ने इंशा

  • 1st Jun 2022

    वो दर्द कि उठा था यहाँ!

    वो टीस कि उभरी थी इधर याद रहेगा,वो दर्द कि उठा था यहाँ याद रहेगा| इब्ने इंशा

  • 1st Jun 2022

    रुख़सत का समां याद रहेगा!

    उस शाम वो रुख़सत का समां याद रहेगा,वो शहर, वो कूचा, वो मकाँ याद रहेगा| इब्ने इंशा

  • 1st Jun 2022

    अपमान!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा बहुत सहज अंदाज़ में गहरी बात कह जाते थे|लीजिए प्रस्तुत है भवानी दादा की यह कविता जो हमारे मन में बहुत सी बार पैदा होने वाले अपमान के भाव का सामना…

  • 31st May 2022

    यहीं आके फिसलते क्यों हैं!

    मोड़ होता है जवानी का संभलने के लिए,और सब लोग यहीं आके फिसलते क्यों हैं| राहत इन्दौरी

  • 31st May 2022

    मेरी छत पे टहलते क्यों हैं!

    नींद से मेरा त’अल्लुक़ ही नहीं बरसों से,ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं| राहत इन्दौरी

  • 31st May 2022

    मेरे नाम से जलते क्यों हैं!

    मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ,रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं| राहत इन्दौरी

  • 31st May 2022

    घर से निकलते क्यों हैं!

    लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं,इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं| राहत इन्दौरी

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