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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Jun 2022

    अजीब महक साथ ले के आई है!

    बड़ी अजीब महक साथ ले के आई है,नसीम, रात बसर की किसी गुलाब के साथ| शहरयार

  • 13th Jun 2022

    रिश्ता था जब सराब के साथ!

    तो फिर बताओ समंदर सदा को क्यूँ सुनते,हमारी प्यास का रिश्ता था जब सराब के साथ| शहरयार

  • 13th Jun 2022

    धूप नहीं निकली आफ़ताब के साथ!

    कटेगा देखिए दिन जाने किस अज़ाब* के साथ,कि आज धूप नहीं निकली आफ़ताब के साथ|*कष्ट, उत्पीड़न शहरयार

  • 13th Jun 2022

    आधी रात नींद खुल जाए!

    पहली बार आज मैं श्री रमेश गौड़ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूं| मुझे याद नहीं है कि कभी मुझे उनका कविता पाठ सुनने का अवसर मिला हो, लेकिन वे अक्सर दिल्ली के कनॉट प्लेस में, कॉफी हाउस में उपस्थित रहते थे, बड़े प्रेम से मिलते थे और किसी कवि सम्मेलन में भी…

  • 12th Jun 2022

    मातृभूमि !

    आज एक बार फिर मैं राष्ट्र प्रेम, स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी और ईश्वर भक्ति- इन सभी विषयों पर अपनी लेखनी के माध्यम से अनेक अमर रचनाएं प्रदान करने वाले स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की एक और अमर रचना आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है यह रचना- ऊँचा…

  • 11th Jun 2022

    मन, कितना अभिनय शेष रहा!

    कुछ नया लिखने का मन नहीं है आज, इसलिए एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ, और एक श्रेष्ठ गीत फिर से आपके सम्मुख रख रहा हूँ| आज हिंदी कविता, विशेष रूप से गीतों के एक अनूठे हस्ताक्षर- स्व. भारत भूषण जी का एक और गीत शेयर कर रहा हूँ। भारत भूषण जी मेरे…

  • 10th Jun 2022

    हरिद्वार हरि का द्वार!

    फिलहाल हरिद्वार में हूँ| कई बार सोचा है कि हरिद्वार में आकर कुछ समय रहूँ, इस धर्मनगरी, मोक्ष प्रदायिनी माँ गंगा, हर की पैड़ी, जहां लाखों तीर्थयात्री आते हैं और मरने के बाद तो अधिकांश हिन्दू, राख के रूप में प्रवाहित होने आते हैं, जिनके बच्चे उनके लिए ऐसा करते हैं| लेकिन धर्म नगरी भी…

  • 9th Jun 2022

    ’नक़्श’ ने फिर न आइना देखा!

    जाने चेहरे पे क्या नज़र आया,’नक़्श’ ने फिर न आइना देखा। नक़्श लायलपुरी

  • 9th Jun 2022

    उम्रभर हमने रास्ता देखा!

    कौन था इन्तिज़ार किसका था,उम्रभर हमने रास्ता देखा। नक़्श लायलपुरी

  • 9th Jun 2022

    नींद टूटी तो फिर नहीं आई!

    नींद टूटी तो फिर नहीं आई,क्या बताएँ कि ख़्वाब क्या देखा ! नक़्श लायलपुरी

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