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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Dec 2022

    पड़ोसी के घर आया होगा!

    दिल-ए-नादाँ न धड़क ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क, कोई ख़त ले के पड़ोसी के घर आया होगा| कैफ़ भोपाली

  • 5th Dec 2022

    दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा!

    कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा, मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा| कैफ़ भोपाली

  • 5th Dec 2022

    अच्छा लगा!

    श्री रामदरश मिश्र जी ने साहित्य की लगभग सभी विधाओं में अपना योगदान किया है| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज उनकी एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, जो सामान्य ग़ज़लों से काफी लंबी है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह ग़ज़ल– आज धरती पर झुका आकाश…

  • 4th Dec 2022

    लोग कुछ डूबते नजर आए!

    जब भी आंखों में अश्क भर आए लोग कुछ डूबते नजर आएचांद जितने भी गुम हुए शब के सब के इल्ज़ाम मेरे सर आए| गुलज़ार

  • 4th Dec 2022

    जैसे हम को पुकारता है कोई!

    देर से गूँजते हैं सन्नाटे जैसे हम को पुकारता है कोई । गुलज़ार

  • 4th Dec 2022

    आ के फूँक दो उड़ता नहीं धुआँ!

    चिंगारी इक अटक सी गई मेरे सीने में, थोड़ा सा आ के फूँक दो उड़ता नहीं धुआँ| गुलज़ार

  • 4th Dec 2022

    चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ!

    आँखों के पोछने से लगा आग का पता, यूँ चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ| गुलज़ार

  • 4th Dec 2022

    लकीरें खींच रहा है फ़ज़ाओं में!

    काली लकीरें खींच रहा है फ़ज़ाओं में, बौरा गया है मुँह से क्यूँ खुलता नहीं धुआँ| गुलज़ार

  • 4th Dec 2022

    अब उठता नहीं धुआँ!

    चूल्हे नहीं जलाए कि बस्ती ही जल गई, कुछ रोज़ हो गए हैं अब उठता नहीं धुआँ| गुलज़ार

  • 4th Dec 2022

    आँसुओं के मरासिम पुराने हैं!

    आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं, मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ| गुलज़ार

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