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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th May 2026

    बे-चराग़ ये घर न हो!

    ये ग़ज़ल कि जैसे हिरन की आँख में पिछली रात की चाँदनी,न बुझे ख़राबे की रौशनी कभी बे-चराग़ ये घर न हो। बशीर बद्र

  • 12th May 2026

    न उठे सितारों की पालकी!

    मिरे बाज़ुओं में थकी थकी अभी महव-ए-ख़्वाब है चाँदनी न उठे सितारों की पालकी अभी आहटों का गुज़र न हो। बशीर बद्र

  • 12th May 2026

    मिरी दुआ में असर न हो!

    वो बड़ा रहीम ओ करीम है मुझे ये सिफ़त भी अता करे, तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मिरी दुआ में असर न हो। बशीर बद्र

  • 12th May 2026

    मुझे एक रात नवाज़ दे!

    कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो,मुझे एक रात नवाज़ दे मगर इस के बा’द सहर न हो। बशीर बद्र

  • 12th May 2026

    जान तुझ पर निसार करता हूँ!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत हैं, मेरे स्वर में मिर्ज़ा ग़ालिब जी की ग़ज़ल के कुछ और शेर- जान तुझ पर निसार करता हूँ, मैं नहीं जानता दुआ क्या है! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******

  • 12th May 2026

    कोई दुश्मन न कोई दोस्त!

    जंगल में दूर तक कोई दुश्मन न कोई दोस्त,मानूस हो चले हैं मगर बम्बई से हम| निदा फ़ाज़ली

  • 12th May 2026

    पल पल दिल के पास!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म-ब्लैकमेल के लिए किशोर कुमार जी का गाया यह गीत शेयर कर रहा हूँ जिसे राजेंद्र कृष्ण जी ने लिखा था और कल्याणजी आनंदजी ने इसका संगीत तैयार किया था- पल पल दिल के पास तुम रहती हो! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 12th May 2026

    किसी दिन!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय मंगलेश डबराल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मंगलेष डबराल जी की यह कविता – किसी दिन हम दीवाल पर पीठ टिका देंगेहम जो बैठे हैंरोशनी में कविता बाँचते हुए किसी दिन हमारे…

  • 11th May 2026

    अच्छी भली थी दुनिया!

    अच्छी भली थी दुनिया गुज़ारे के वास्ते,उलझे हुए हैं अपनी ही ख़ुद-आगही से हम| निदा फ़ाज़ली

  • 11th May 2026

    शाइस्ता महफ़िलों की !

    शाइस्ता महफ़िलों की फ़ज़ाओं में ज़हर था,ज़िंदा बचे हैं ज़ेहन की आवारगी से हम| निदा फ़ाज़ली

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