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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th May 2026

    नाविक – रवींद्र नाथ ठाकुर 

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 14th May 2026

    न कभी तुम्हारी झिजक गई!

    भला हम मिले भी तो क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासले,न कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिजक गई। बशीर बद्र

  • 14th May 2026

    चांदी की दीवार न तोड़ी!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में फिल्म-विश्वास के लिए मुकेश जी का गाया मधुर गीत जिसे गुलशन बावरा जी ने लिखा था और इसका संगीत कल्याणजी आनंदजी ने दिया था- चांदी की दीवार न तोड़ी प्यार भरा दिल तोड़ दिया! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । ******

  • 14th May 2026

    कालू नहीं रहा!

    देश वही है, काल वही है कालू नहीं रहामानवता का हाल वही है कालू नही रहा। जब तक था जीवन , घर भर में फिरता रहता था,दिखता कम था पर अनुभव से तिरता रहता था,थी पहचान उसे इस घर के कोने कोने कीभोजन स्थल की और खास कर निजी बिछौने की, किसी एक कोने में…

  • 13th May 2026

    मिरे साथ था तुझे जागना!

    मिरी दास्ताँ का उरूज था तिरी नर्म पलकों की छाँव में,मिरे साथ था तुझे जागना तिरी आँख कैसे झपक गई। बशीर बद्र

  • 13th May 2026

    अपने होठों पर सजाना चाहता हूँ!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में क़तील शिफाई जी की ग़ज़ल के दो शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ- अपने होठों पर सजाना चाहता हूँ! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******

  • 13th May 2026

    मेरी रात कैसे चमक गई!

    कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई,मैं चराग़ वो भी बुझा हुआ मेरी रात कैसे चमक गई। बशीर बद्र

  • 13th May 2026

    ख़त्म अपना सफ़र न हो!

    कभी दिन की धूप में झूम के कभी शब के फूल को चूम केयूँ ही साथ साथ चलें सदा कभी ख़त्म अपना सफ़र न हो। बशीर बद्र

  • 13th May 2026

    मेरे महबूब क़यामत होगी!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मै आज किशोर कुमार जी का गाया ‘मिस्टर एक्स इन बॉम्बे’ फिल्म का गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा था और इसका संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोडी ने तैयार किया था- मेरे महबूब क़यामत होगी, आज रुसवा तेरी गलियों मे मोहब्बत…

  • 13th May 2026

    कुंज कुटीरे यमुना तीरे!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की यह कविता – पगली तेरा ठाट !किया है रतनाम्बर परिधानअपने काबू नहीं,और यह सत्याचरण विधान ! उन्मादक मीठे सपने ये,ये न…

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