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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Jan 2023

    वैसी अदावत नहीं रही!

    कुछ दोस्तों से वैसे मरासिम नहीं रहे,कुछ दुश्मनों से वैसी अदावत नहीं रही| दुष्यंत कुमार

  • 13th Jan 2023

    मुल्क में हमारी हक़ूमत नहीं रही!

    हमको पता नहीं था हमें अब पता चला,इस मुल्क में हमारी हक़ूमत नहीं रही| दुष्यंत कुमार

  • 13th Jan 2023

    भद्रजन, भद्रलोक

    अभी नया वर्ष शुरू हुआ है और एक-दो घटनाएं ऐसी हो गईं, देश-विदेश में और ऐसी जिनमें भारतीय शामिल थे| विशेष रूप से इन पर बात करने का विचार इसलिए भी आया कि ऐसी घटनाओं को फ़्लाइट्स में अंजाम दिया गया| वायुयान से यात्रा करने वाले लोग, कम से कम भारतवर्ष में काफी हद तक…

  • 11th Jan 2023

    दुष्ट डाकिया-रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 11th Jan 2023

    किसी ख़ुदा की इनायत नहीं रही!

    हमने तमाम उम्र अकेले सफ़र किया,हम पर किसी ख़ुदा की इनायत नहीं रही| दुष्यंत कुमार

  • 10th Jan 2023

    रोशनी थी वो भी सलामत नहीं रही!

    कैसी मशालें ले के चले तीरगी में आप,जो रोशनी थी वो भी सलामत नहीं रही| दुष्यंत कुमार

  • 10th Jan 2023

    सर पे कोई छत नहीं रही!

    खँडहर बचे हुए हैं, इमारत नहीं रही,अच्छा हुआ कि सर पे कोई छत नहीं रही| दुष्यंत कुमार

  • 10th Jan 2023

    टूटते कगार से!

    आज एक बार फिर से मैं, अपने अत्यंत प्रिय नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| रंजक जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत – चाँदनी रात हुई जब झील झाँकने लगी अनमनी प्रीत गीत के…

  • 9th Jan 2023

    प्यार भी दरिया है उतर जाएगा!

    आख़िरश वो भी कहीं रेत पे बैठी होगी, तेरा ये प्यार भी दरिया है उतर जाएगा| परवीन शाकिर

  • 9th Jan 2023

    इक ज़ख़्म है भर जाएगा!

    हम तो समझे थे कि इक ज़ख़्म है भर जाएगा, क्या ख़बर थी कि रग-ए-जाँ में उतर जाएगा| परवीन शाकिर

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