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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Jan 2023

    वो हीरा है वो माटी हो या कंकर हो!

    जिस चीज़ से तुझ को निस्बत है जिस चीज़ की तुझ को चाहत है, वो सोना है वो हीरा है वो माटी हो या कंकर हो| इब्न ए इंशा

  • 8th Jan 2023

    चल नगरी में सौदागर हो!

    अब हुस्न का रुत्बा आली है अब हुस्न से सहरा ख़ाली है, चल बस्ती में बंजारा बन चल नगरी में सौदागर हो| इब्न ए इंशा

  • 8th Jan 2023

    फिर मेल की सूरत क्यूँकर हो!

    हम साँझ समय की छाया हैं तुम चढ़ती रात के चन्द्रमा, हम जाते हैं तुम आते हो फिर मेल की सूरत क्यूँकर हो| इब्न ए इंशा

  • 8th Jan 2023

    कोई मरहम हो कोई निश्तर हो!

    ये दिल है कि जलते सीने में इक दर्द का फोड़ा अल्लहड़ सा, ना गुप्त रहे ना फूट बहे कोई मरहम हो कोई निश्तर हो| इब्न ए इंशा

  • 8th Jan 2023

    हम नदियाँ हैं तुम सागर हो!

    इक भीक के दोनों कासे हैं इक प्यास के दोनो प्यासे हैं, हम खेती हैं तुम बादल हो हम नदियाँ हैं तुम सागर हो| इब्न ए इंशा

  • 8th Jan 2023

    अब आन मिलो तो बेहतर हो!

    दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो, इस बात से हमको क्या मतलब ये कैसे हो, ये क्यूँकर हो| इब्न ए इंशा

  • 8th Jan 2023

    चेतक की वीरता!

    आज विशेष रूप से महाराणा प्रताप की वीरता की कथाओं को अपनी कविताओं के माध्यम से स्वर देने वाले स्वर्गीय श्यामनारायण पाण्डेय जी की एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ जो राणा प्रताप जी के घोड़े चेतक के कौशल और उसके बलिदान को दर्शाती है| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय श्यामनारायण पाण्डेय जी की यह…

  • 7th Jan 2023

    सलीक़ा चाहिए आवारगी में!

    बहुत मुश्किल है बंजारा-मिज़ाजी, सलीक़ा चाहिए आवारगी में| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jan 2023

    बादल छुपा था तिश्नगी में!

    सुलगती रेत में पानी कहाँ था, कोई बादल छुपा था तिश्नगी में| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jan 2023

    सितारे टूटते हैं रात ही में!

    चमकती है अंधेरों में ख़मोशी, सितारे टूटते हैं रात ही में| निदा फ़ाज़ली

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