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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Aug 2022

    प्यार कहाँ समझाने दे!

    फ़स्लें पक जाएँ तो खेत से बिछ्ड़ेंगी, रोती आँख को प्यार कहाँ समझाने दे| वसीम बरेलवी

  • 7th Aug 2022

    हाथों में चाँद आ जाने दे!

    फिर तो ये ऊँचा ही होता जाएगा, बचपन के हाथों में चाँद आ जाने दे| वसीम बरेलवी

  • 7th Aug 2022

    इस बाग़ का एक परिंदा हूँ!

    मैं भी तो इस बाग़ का एक परिंदा हूँ, मेरी ही आवाज़ में मुझको गाने दे| वसीम बरेलवी

  • 7th Aug 2022

    दूर तो मुझ को जाने दे!

    बाबा दुनिया जीत के मैं दिखला दूँगा, अपनी नज़र से दूर तो मुझ को जाने दे| वसीम बरेलवी

  • 7th Aug 2022

    मेरे हिस्से की धूप आने दे!

    अपने साए को इतना समझाने दे, मुझ तक मेरे हिस्से की धूप आने दे| वसीम बरेलवी

  • 7th Aug 2022

    रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा!

    मुझको चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र, रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा| वसीम बरेलवी

  • 7th Aug 2022

    मसअला बन कर खड़ा हो जाऊँगा!

    तुम गिराने में लगे थे तुमने सोचा ही नहीं, मैं गिरा तो मसअला बन कर खड़ा हो जाऊँगा| वसीम बरेलवी

  • 7th Aug 2022

    मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा!

    अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आइना हो जाऊँगा, उसको छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा| वसीम बरेलवी

  • 7th Aug 2022

    गीतों से पहले!

    आज रवींद्र भ्रमर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| रवींद्र भ्रमर जी ने कुछ बहुत सुंदर गीत लिखे हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है रवींद्र भ्रमर जी की यह कविता, जिसमें एक पक्षी के उदाहरण से जीवन में सकारात्मक सोच और उल्लसित रहने का संदेश दिया गया है– पँछी में गाने का गुन हैदो…

  • 6th Aug 2022

    जैसे हो फिर भी अच्छे हो!

    ‘मोहसिन’ तुम बदनाम बहुत हो, जैसे हो फिर भी अच्छे हो| मोहसिन नक़वी

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