-
अधूरे ही!
आज फिर हिन्दी के विख्यात कवि स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| फिल्मी दुनिया के अपने अनुभव को देखते हुए खुद को ‘गीतफ़रोश’ कहने वाले भवानी दादा की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की यह कविता, जिसमें उन्होंने…
-
एक सितारा जल्दी जल्दी डूब गया!
एक सितारा जल्दी जल्दी डूब गया, मैंने जब तारे गिनने की कोशिश की| गुलज़ार
-
ख़्वाब ने सारी रात जगाया है!
एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है, मैंने हर करवट सोने की कोशिश की| गुलज़ार
-
कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ!
कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ, उनसे कितना कुछ कहने की कोशिश की| गुलज़ार
-
चाँद का ख़ंजर घोंप के सीने में!
कल फिर चाँद का ख़ंजर घोंप के सीने में, रात ने मेरी जाँ लेने की कोशिश की| गुलज़ार