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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Jan 2023

    आँखें खोल कर सोने लगा था!

    लगे रहते थे सब दरवाज़े फिर भी, मैं आँखें खोल कर सोने लगा था| राहत इन्दौरी

  • 26th Jan 2023

    समुंदर आबरू खोने लगा था!

    वो इक इक बात पे रोने लगा था, समुंदर आबरू खोने लगा था| राहत इन्दौरी

  • 26th Jan 2023

    अधूरे ही!

    आज फिर हिन्दी के विख्यात कवि स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| फिल्मी दुनिया के अपने अनुभव को देखते हुए खुद को ‘गीतफ़रोश’ कहने वाले भवानी दादा की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की यह कविता, जिसमें उन्होंने…

  • 25th Jan 2023

    दिल बोने की कोशिश की!

    एक धुएँ का मर्ग़ोला सा निकला है, मिट्टी में जब दिल बोने की कोशिश की| गुलज़ार

  • 25th Jan 2023

    ख़त लिखने की कोशिश की!

    नाम मिरा था और पता अपने घर का, उसने मुझको ख़त लिखने की कोशिश की| गुलज़ार

  • 25th Jan 2023

    एक सितारा जल्दी जल्दी डूब गया!

    एक सितारा जल्दी जल्दी डूब गया, मैंने जब तारे गिनने की कोशिश की| गुलज़ार

  • 25th Jan 2023

    ख़्वाब ने सारी रात जगाया है!

    एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है, मैंने हर करवट सोने की कोशिश की| गुलज़ार

  • 25th Jan 2023

    कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ!

    कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ, उनसे कितना कुछ कहने की कोशिश की| गुलज़ार

  • 25th Jan 2023

    कोई रहबर रस्ता काट गया!

    कोई न कोई रहबर रस्ता काट गया, जब भी अपनी रह चलने की कोशिश की| गुलज़ार

  • 25th Jan 2023

    चाँद का ख़ंजर घोंप के सीने में!

    कल फिर चाँद का ख़ंजर घोंप के सीने में, रात ने मेरी जाँ लेने की कोशिश की| गुलज़ार

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