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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Jan 2023

    टहनी से उड़ने की कोशिश की!

    फूल ने टहनी से उड़ने की कोशिश की, इक ताइर* का दिल रखने की कोशिश की|*पक्षी गुलज़ार

  • 25th Jan 2023

    सामने फ्लैट पर!

    हिन्दी के विख्यात व्यंग्यकार और कवि स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| त्यागी जी की इस कविता में भी व्यंग्यकार की दृष्टि परिलक्षित होती है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की यह कविता – सामने फ्लैट परजाड़ों की सुबह नेअलसाकर जूड़ा बाँधा; नीचे के तल्ले मेंमफ़लर…

  • 24th Jan 2023

    किनारों को मिलाते हुए मर जाते हैं!

    हम हैं वो टूटी हुई कश्तियों वाले ‘ताबिश,’ जो किनारों को मिलाते हुए मर जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 24th Jan 2023

    किरदार निभाते हुए मर जाते हैं!

    ये मोहब्बत की कहानी नहीं मरती लेकिन, लोग किरदार निभाते हुए मर जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 24th Jan 2023

    ज़हर पिलाते हुए मर जाते हैं!

    उनके भी क़त्ल का इल्ज़ाम हमारे सर है, जो हमें ज़हर पिलाते हुए मर जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 24th Jan 2023

    ध्यान में लाते हुए मर जाते हैं!

    किस तरह लोग चले जाते हैं उठ कर चुप-चाप, हम तो ये ध्यान में लाते हुए मर जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 24th Jan 2023

    तिरे शहर से जाते हुए मर जाते हैं!

    घर पहुँचता है कोई और हमारे जैसा, हम तिरे शहर से जाते हुए मर जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 24th Jan 2023

    निभाते हुए मर जाते हैं!

    हम हैं सूखे हुए तालाब पे बैठे हुए हंस, जो तअ’ल्लुक़ को निभाते हुए मर जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 24th Jan 2023

    प्यास बुझाते हुए मर जाते हैं!

    दश्त में प्यास बुझाते हुए मर जाते हैं, हम परिंदे कहीं जाते हुए मर जाते हैं| अब्बास ताबिश

  • 24th Jan 2023

    युवा जंगल!

    आधुनिक हिन्दी कवि और भारत सरकार की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में किसी समय अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| मैंने पहले भी अशोक वाजपेयी जी की कुछ कविताएं शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता –…

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