Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 23rd Jan 2023

    मुझे तलाश है सुनहरे हिरण की !

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट|आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत…

  • 22nd Jan 2023

    तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता!

    मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है, कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता| बशीर बद्र

  • 22nd Jan 2023

    हज़ारों शेर मेरे सो गए!

    हज़ारों शेर मेरे सो गए काग़ज़ की क़ब्रों में, अजब माँ हूँ कोई बच्चा मिरा ज़िंदा नहीं रहता| बशीर बद्र

  • 21st Jan 2023

    पंटर चला गया!

    बीता दिन पंटर का आखिरी दिन था| पिछले 15 वर्ष हमारे साथ बिताने के बाद हमारा प्रिय पंटर आखिर चला गया| एक महीने का था जब हमारे पास आया था, जब हम एनटीपीसी की ऊंचाहार परियोजना में थे| दिल्ली में बेटे ने अपने एक मित्र से उसको लिया था और वहाँ से अपनी पहली रेल…

  • 20th Jan 2023

    मिलने में हमेशा फ़ासला रखना!

    बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना, जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता| बशीर बद्र

  • 20th Jan 2023

    देर तक चेहरा नहीं रहता!

    परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता, किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता| बशीर बद्र

  • 20th Jan 2023

    तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है !

    तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकीं, तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई| बशीर बद्र

  • 20th Jan 2023

    शराब थी कहीं रास्ते में छलक गई!

    तिरे हाथ से मेरे होंट तक वही इंतिज़ार की प्यास है, मिरे नाम की जो शराब थी कहीं रास्ते में छलक गई| बशीर बद्र

  • 20th Jan 2023

    न कभी तुम्हारी झिझक गई!

    भला हम मिले भी तो क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासले, न कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिझक गई| बशीर बद्र

  • 20th Jan 2023

    तिरी आँख कैसे झपक गई!

    मिरी दास्ताँ का उरूज था तिरी नर्म पलकों की छाँव में, मिरे साथ था तुझे जागना तिरी आँख कैसे झपक गई| बशीर बद्र

←Previous Page
1 … 1,040 1,041 1,042 1,043 1,044 … 1,529
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,132 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar