Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 29th Jan 2023

    सबको होगा याद सब!

    भूल के सब रंजिशें सब एक हैं, मैं बताऊँ सबको होगा याद सब| जावेद अख़्तर

  • 29th Jan 2023

    कहने को हैं घर आबाद सब!

    सबकी ख़ातिर हैं यहाँ सब अजनबी, और कहने को हैं घर आबाद सब| जावेद अख़्तर

  • 29th Jan 2023

    मैं अकेला ही नहीं बर्बाद सब!

    ये तसल्ली है कि हैं नाशाद सब, मैं अकेला ही नहीं बर्बाद सब| जावेद अख़्तर

  • 29th Jan 2023

    जो कुटिलता से जियेंगे!

    आज एक बार मैं हिन्दी काव्य मंचों के एक प्रमुख कवि और सांसद भी रहे स्वर्गीय बालकवि बैरागी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| बैरागी जी की कविताओं में साफ़गोई और खुद्दारी की अभिव्यक्ति प्रमुखता से मिलती थी| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बालकवि बैरागी जी की यह कविता – छीनकर छ्लछंद से…

  • 28th Jan 2023

    ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी!

    वक़्त अच्छा भी आएगा ‘नासिर’, ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी| नासिर काज़मी

  • 28th Jan 2023

    शहर में रात जागती है अभी!

    तुम तो यारो अभी से उठ बैठे, शहर में रात जागती है अभी| नासिर काज़मी

  • 28th Jan 2023

    एक खिड़की मगर खुली है अभी!

    सो गए लोग उस हवेली के, एक खिड़की मगर खुली है अभी| नासिर काज़मी

  • 28th Jan 2023

    ज़िंदगी तुझको ढूँडती है अभी!

    शहर की बे-चराग़ गलियों में, ज़िंदगी तुझको ढूँडती है अभी| नासिर काज़मी

  • 28th Jan 2023

    तेरी आवाज़ आ रही है अभी!

    याद के बे-निशाँ जज़ीरों से, तेरी आवाज़ आ रही है अभी| नासिर काज़मी

  • 28th Jan 2023

    हम-सुख़न तेरी ख़ामुशी है अभी!

    तू शरीक-ए-सुख़न नहीं है तो क्या, हम-सुख़न तेरी ख़ामुशी है अभी| नासिर काज़मी

←Previous Page
1 … 1,034 1,035 1,036 1,037 1,038 … 1,529
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,132 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar