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मिसाल में मिला मुझे!
तमाम इल्म ज़ीस्त का गुज़िश्तगाँ से ही हुआ, अमल गुज़िश्ता दौर का मिसाल में मिला मुझे| मुनीर नियाज़ी
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वो मलाल में मिला मुझे!
गया तो इस तरह गया कि मुद्दतों नहीं मिला, मिला जो फिर तो यूँ कि वो मलाल में मिला मुझे| मुनीर नियाज़ी
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जवाब भी, सवाल में मिला मुझे!
ख़याल जिसका था मुझे, ख़याल में मिला मुझे, सवाल का जवाब भी, सवाल में मिला मुझे| मुनीर नियाज़ी
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रे मन!
एक बार फिर से मैं आज भारतीय स्वाधीनता संग्राम को अपनी वाणी प्रदान करने वाले स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| द्विवेदी जी की कई कविताएं मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ|लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की यह कविता – प्रबल झंझावत में तूबन…
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पूछा हाल कुछ ऐसी अदा के साथ!
ऐसा लगा ग़रीबी की रेखा से हूँ बुलंद, पूछा किसी ने हाल कुछ ऐसी अदा के साथ| कैफ़ी आज़मी
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जाग उट्ठे हैं आवाज़-ए-पा के साथ!
इक्कीसवीं सदी की तरफ़ हम चले तो हैं, फ़ित्ने भी जाग उट्ठे हैं आवाज़-ए-पा के साथ| कैफ़ी आज़मी
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मगर नाख़ुदा के साथ!
गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो, डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ| कैफ़ी आज़मी