-
शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते!
हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते. वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते| गुलज़ार
-
समर निंद्य है, भाग-1
आज मैं सबसे पहले सभी साथियों को स्वाधीनता दिवस, हमारी आजादी के अमृत महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ| आज इस अवसर पर मैं राष्ट्रकवि स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ, इस कविता का संदर्भ ‘महाभारत’ का है, एक ही शीर्षक से दिनकर जी ने कई कविताएं लिखी हैं,…
-
तमाम ग़ुंचे तो खिला नहीं करते!
हर इक दुआ के मुक़द्दर में कब हुज़ूरी है, तमाम ग़ुंचे तो ‘अमजद’ खिला नहीं करते| अमजद इस्लाम अमजद
-
ऐसी दुआ नहीं करते!
जो हम पे गुज़री है जानाँ वो तुम पे भी गुज़रे, जो दिल भी चाहे तो ऐसी दुआ नहीं करते| अमजद इस्लाम अमजद
-
अगर सिलसिला नहीं करते!
हमें हमारी अनाएँ* तबाह कर देंगी, मुकालमे** का अगर सिलसिला नहीं करते| *Ego, **Dialogue अमजद इस्लाम अमजद
-
यूँ दिल बुरा नहीं करते!
जहाँ हो प्यार ग़लत-फ़हमियाँ भी होती हैं, सो बात बात पे यूँ दिल बुरा नहीं करते| अमजद इस्लाम अमजद
-
रफ़ू से सिला नहीं करते!
वफ़ा की आँच सुख़न का तपाक दो इनको, दिलों के चाक रफ़ू से सिला नहीं करते| अमजद इस्लाम अमजद
-
फिर से जुड़ा नहीं करते!
ये आइनों की तरह देख-भाल चाहते हैं, कि दिल भी टूटें तो फिर से जुड़ा नहीं करते| अमजद इस्लाम अमजद
-
मेरा मींजा दिल!
स्वर्गीय रघुवीर सहाय जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ, प्रयोगवाद और नई कविता के दौर में इस तरह की कविताएं भी लिखी जातीं थी इसके एक उदाहरण के रूप में इसे देख लीजिए|लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रघुवीर सहाय जी की यह कविता – एक शोर में अगली सीट पे थादुनिया का…