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इश्क़ का इज़हार होना चाहिए!
आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिए, इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए| मुनव्वर राना
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मापदण्ड बदलो!
अत्यंत लोकप्रिय कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी द्वारा आपातकाल में लिखी गई ग़ज़लों के संग्रह ‘साये में धूप’ से अनेक ग़ज़लें शेयर की जाती हैं और मैंने भी की हैं| लेकिन दुष्यंत जी का पारंपरिक जुझारू कविता में भी समान दखल था| मैंने दुष्यंत जी की कुछ कविताएं पहले भी शेयर की हैं, ऐसी ही…
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दिल को बहलाना तो होगा!
दिल की बातें नहीं है तो दिलचस्प ही कुछ बातें हों, ज़िंदा रहना है तो दिल को बहलाना तो होगा| जावेद अख़्तर
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वो दीवाना तो होगा!
कुछ बातों के मतलब हैं और कुछ मतलब की बातें, जो ये फ़र्क़ समझ लेगा वो दीवाना तो होगा| जावेद अख़्तर
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ऐ दिल अब जाना तो होगा!
डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से, लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा| जावेद अख़्तर
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उसने हमको पहचाना तो होगा!
याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगा, कल रस्ते में उसने हमको पहचाना तो होगा| जावेद अख़्तर
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मेरा हो घर अच्छा नहीं लगता!
ये क्यूँ बाक़ी रहे आतिश-ज़नो ये भी जला डालो, कि सब बे-घर हों और मेरा हो घर अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर
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अब शजर अच्छा नहीं लगता!
बुलंदी पर उन्हें मिट्टी की ख़ुश्बू तक नहीं आती, ये वो शाख़ें हैं जिनको अब शजर अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर
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क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता!
मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है, किसी का भी हो सर, क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता| जावेद अख़्तर