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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th Aug 2022

    नींद उड़ा देनी चाहिए!

    मैं ख़्वाब हूँ तो ख़्वाब से चौंकाइए मुझे, मैं नींद हूँ तो नींद उड़ा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    मुझको दुआ देनी चाहिए!

    मैं जब्र हूँ तो जब्र की ताईद बंद हो, मैं सब्र हूँ तो मुझको दुआ देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    ख़ाक उड़ा देनी चाहिए!

    मैं ताज हूँ तो ताज को सर पर सजाएँ लोग, मैं ख़ाक हूँ तो ख़ाक उड़ा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    आग बुझा देनी चाहिए!

    मैं फूल हूँ तो फूल को गुल-दान हो नसीब, मैं आग हूँ तो आग बुझा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    नक़ाब उठा देनी चाहिए!

    मैं ख़ुद भी करना चाहता हूँ अपना सामना, तुझको भी अब नक़ाब उठा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    ला के छुपा देनी चाहिए!

    दिल भी किसी फ़क़ीर के हुजरे से कम नहीं, दुनिया यहीं पे ला के छुपा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    पूँजी लगा देनी चाहिए!

    अल्लाह बरकतों से नवाज़ेगा इश्क़ में, है जितनी पूँजी पास लगा देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    पिला देनी चाहिए!

    बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए, मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 24th Aug 2022

    बहुत छोटी जगह!

    आज मैं हिन्दी के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की कविता शेयर कर रहा हूँ, जो बातचीत के लहज़े में सहज रूप से ही दिव्य बात कह जाते थे| भवानी दादा की आज की कविता परिवार के वातावरण पर आधारित है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की यह कविता…

  • 23rd Aug 2022

    दर-ए-ख़ैबर नहीं गिरता!

    करना है जो सर मा’रका-ए-ज़ीस्त तो सुन ले, बे-बाज़ू-ए-हैदर दर-ए-ख़ैबर नहीं गिरता| क़तील शिफ़ाई

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