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तो धज्जियाँ उड़ जाएँ!
बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर, जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी
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पगड़ियाँ उड़ जाएँ!
हवाएँ बाज़ कहाँ आती हैं शरारत से, सरों पे हाथ न रक्खें तो पगड़ियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी
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आसमाँ उड़ जाएँ!
रहे ख़याल कि मज्ज़ूब*-ए-इश्क़ हैं हम लोग, अगर ज़मीन से फूंकें तो आसमाँ उड़ जाएँ| *डूबा हुआ राहत इंदौरी
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किताब साँसों की!
बिखर बिखर सी गई है किताब साँसों की, ये काग़ज़ात ख़ुदा जाने कब कहाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी
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हड्डियाँ उड़ जाएँ!
ज़मीं से एक तअल्लुक़ ने बाँध रक्खा है, बदन में ख़ून नहीं हो तो हड्डियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी
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बस्तियाँ उड़ जाएँ!
ख़ुदा का शुक्र कि मेरा मकाँ सलामत है, हैं उतनी तेज़ हवाएँ कि बस्तियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी
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सर्दियाँ उड़ जाएँ!
ये सर्द रातें भी बनकर अभी धुआँ उड़ जाएँ, वो इक लिहाफ़ मैं ओढूँ तो सर्दियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी
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दिल है तुम्हारा फूल सा
बे-कार जी पे बोझ लिए फिर रहे हो तुम, दिल है तुम्हारा फूल सा अफ़्सोस मत करो| बशीर बद्र
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फिर से ख़ुदा मिलाएगा!
वो तुमसे आज दूर है कल पास आएगा, फिर से ख़ुदा मिलाएगा अफ़्सोस मत करो| बशीर बद्र
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फूलों पे तितलियाँ!
ये देखो फिर से आ गईं फूलों पे तितलियाँ, इक रोज़ वो भी आएगा अफ़्सोस मत करो| बशीर बद्र