Category: Uncategorized
-
मरघट!
किसी जमाने में हिन्दी काव्य मंचों से जिन कवियों को सुनने में मुझे काफी आनंद आता था, उनमें स्वर्गीय शिशुपाल सिंह ‘निर्धन’ जी भी शामिल थे| उनके एक गीत की पंक्तियाँ बहुत प्रसिद्ध हुई थीं- एक पुराने दुख ने पूछा क्या तुम अभी वहीं रहते हो, उत्तर दिया चले मत आना, मैंने वो घर बदल…
-
मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी!
कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है, मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी| जावेद अख़्तर