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रीती गागर का क्या होगा!
आज फिर से मैं जिनको हिन्दी में गीतों के राजकुंवर के नाम से जाना जाता है, ऐसे स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी कवि सम्मेलनों की शान हुआ करते थे और हिन्दी फ़िल्मों के लिए भी उन्होंने कुछ अमर गीत लिखे हैं| नीरज जी की कुछ रचनाएं…
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कई क़र्ज़ हैं मगर!
इस ज़िंदगी के मुझ पे कई क़र्ज़ हैं मगर, मैं जल्द लौट आऊँगा अफ़्सोस मत करो| बशीर बद्र
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बचा कुछ भी नहीं!
दो-चार दिन की बात है दिल ख़ाक में मिल जाएगा, जब आग पर काग़ज़ रखा बाक़ी बचा कुछ भी नहीं| बशीर बद्र
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आवाज़ के जुगनू कहाँ!
एहसास की ख़ुशबू कहाँ आवाज़ के जुगनू कहाँ, ख़ामोश यादों के सिवा घर में रहा कुछ भी नहीं| बशीर बद्र
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इक शाम के साए तले!
इक शाम के साए तले बैठे रहे वो देर तक, आँखों से की बातें बहुत मुँह से कहा कुछ भी नहीं| बशीर बद्र
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लिखा कुछ भी नहीं!
जिस पर हमारी आँख ने मोती बिछाए रात भर, भेजा वही काग़ज़ उसे हमने लिखा कुछ भी नहीं| बशीर बद्र
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तेरी ख़ता कुछ भी नहीं
सोचा तुझे देखा तुझे चाहा तुझे पूजा तुझे, मेरी ख़ता मेरी वफ़ा तेरी ख़ता कुछ भी नहीं| बशीर बद्र