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उर पर पत्थर धर दो!
एक बार फिर से मैं आज हिन्दी गीत जगत के विराट व्यक्तित्व स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| एक समय था जब बच्चन जी ने गीत के श्रोताओं को दीवाना बना दिया था और दूर-दूर से लोग उनका काव्य पाठ सुनने के लिए जाते थे| बच्चन जी की कुछ रचनाएं…
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वैसी तो दुनिया नहीं!
जैसी होनी चाहिए थी वैसी तो दुनिया नहीं, दुनिया-दारी भी ज़रूरत है चलो यूँ ही सही| निदा फ़ाज़ली
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आदमिय्यत है चलो!
भूल थी अपनी फ़रिश्ता आदमी में ढूँडना, आदमी में आदमिय्यत है चलो यूँ ही सही| निदा फ़ाज़ली
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लिबासों की तरह!
मैले हो जाते हैं रिश्ते भी लिबासों की तरह, दोस्ती हर दिन की मेहनत है चलो यूँ ही सही| निदा फ़ाज़ली
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होगा कहीं उसकी तरह
वो नहीं तो कोई तो होगा कहीं उसकी तरह, जिस्म में जब तक हरारत है चलो यूँ ही सही| निदा फ़ाज़ली
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बेवफ़ा वो हैं तो क्या!
हम कहाँ के देवता हैं बेवफ़ा वो हैं तो क्या, घर में कोई घर की ज़ीनत है चलो यूँ ही सही| निदा फ़ाज़ली
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चलो यूँ ही सही!
आनी जानी हर मोहब्बत है चलो यूँ ही सही, जब तलक है ख़ूबसूरत है चलो यूँ ही सही| निदा फ़ाज़ली
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चरवाहों की जागीरें हैं!
हर जंगल की एक कहानी वो ही भेंट वही क़ुर्बानी, गूँगी बहरी सारी भेड़ें चरवाहों की जागीरें हैं| निदा फ़ाज़ली
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मेरा तेरा ख़ून बहा है!
जब भी कोई तख़्त सजा है मेरा तेरा ख़ून बहा है, दरबारों की शान-ओ-शौकत मैदानों की शमशीरें हैं| निदा फ़ाज़ली
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चंद घरों में ताबीरें हैं!
आज और कल की बात नहीं है सदियों की तारीख़ यही है, हर आँगन में ख़्वाब हैं लेकिन चंद घरों में ताबीरें हैं| निदा फ़ाज़ली