Category: Uncategorized
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ये काम किसका था!
वो क़त्ल करके मुझे हर किसी से पूछते हैं, ये काम किसने किया है ये काम किसका था| दाग़ देहलवी
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वो नाम किसका था!
तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था, न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था| दाग़ देहलवी
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तुम जलाकर दिये !
आज एक बार फिर से मैं अपने समय में काव्य मंचों के एक लोकप्रिय कवि रहे स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| नेपाली जी की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की यह कविता – तुम जलाकर दिये,…
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परवाने हज़ारों हैं!
इस शम-ए-फ़रोज़ाँ को आँधी से डराते हो, इस शम-ए-फ़रोज़ाँ के परवाने हज़ारों हैं| शहरयार
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दीवाने हज़ारों हैं!
इक तुम ही नहीं तन्हा उल्फ़त में मिरी रुस्वा, इस शहर में तुम जैसे दीवाने हज़ारों हैं| शहरयार
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ये न सोचा हमने!
उम्र भर सच ही कहा सच के सिवा कुछ न कहा, अज्र क्या इसका मिलेगा ये न सोचा हमने| शहरयार
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ख़्वाब न देखा हमने!
कौन सा क़हर ये आँखों पे हुआ है नाज़िल, एक मुद्दत से कोई ख़्वाब न देखा हमने| शहरयार
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क्या ख़ूब निभाया हमने!
ख़ुद पशीमान हुए न उसे शर्मिंदा किया, इश्क़ की वज़्अ को क्या ख़ूब निभाया हमने| शहरयार