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अंधेरे का मुसाफिर!
आज मैं अपने समय के श्रेष्ठ कवि और दिनमान पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता – यह सिमटती साँझ,यह वीरान जंगल का…
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मैं समर्पित-बीज सा!
आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी गीत कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र शुक्ल जी का यह नवगीत – मैं वहीं हूँ जिस जगह पहले कभी था लोग कोसों दूर आगे बढ़ गए हैं ।…
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मेरे ये ग़ज़ल के मिसरे!
दर-ओ-दीवार हैं मेरे ये ग़ज़ल के मिसरे, क्या सुख़न-वर से सुख़न-वर का पता पूछता है| राजेश रेड्डी