Category: Uncategorized
-
देख ली दुनिया हमने!
जुस्तुजू जिसकी थी उस को तो न पाया हमने, इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने| शहरयार
-
अंधेरे का मुसाफिर!
आज एक बार फिर से मैं अपनी तरह के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| भवानी दादा की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की यह कविता, जिसमें उन्होंने मृत्यु का उल्लेख अपने अलग अंदाज़ में किया है…