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किरण धेनुएं!
आज मैं ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों से अलंकृत किए गए स्वर्गीय नरेश मेहता जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| मेहता जी की रचना मैं आज पहली बार शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नरेश मेहता जी की यह सुंदर कविता – उदयाचल से किरन-धेनुएँहाँक ला रहा वह…
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‘मीर’ का दीवान यहाँ भी है वहाँ भी!
उठता है दिल-ओ-जाँ से धुआँ दोनों तरफ़ ही, ये ‘मीर’ का दीवान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली
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खेल का मैदान यहाँ भी है वहाँ भी!
रहमान की रहमत हो कि भगवान की मूरत, हर खेल का मैदान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली
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इंसान परेशान यहाँ भी है वहाँ भी!
हिन्दू भी सुकूँ से है मुसलमाँ भी सुकूँ से, इंसान परेशान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली
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दरिंदों के फ़क़त नाम अलग हैं!
ख़ूँ-ख़्वार दरिंदों के फ़क़त नाम अलग हैं, हर शहर बयाबान यहाँ भी है वहाँ भी| निदा फ़ाज़ली