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ठहराव!
आज मैं अपने समय के प्रसिद्ध हिन्दी कवि रहे स्वर्गीय शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अनेक पुरस्कारों से अलंकृत सुमन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जी की यह कविता – तुम तो यहीं ठहर गयेठहरे तो…
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याद रहेगा हमें हाँ याद रहेगा!
हम भूल सके हैं न तुझे भूल सकेंगे, तू याद रहेगा हमें हाँ याद रहेगा| इब्न-ए-इंशा
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हसरत का जहाँ याद रहेगा!
आँखों में सुलगती हुई वहशत के जिलौ में, वो हैरत ओ हसरत का जहाँ याद रहेगा| इब्न-ए-इंशा
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दर्द का था जिनमें बयाँ याद रहेगा!
कुछ ‘मीर’ के अबयात थे कुछ ‘फ़ैज़’ के मिसरे, इक दर्द का था जिनमें बयाँ याद रहेगा| इब्न-ए-इंशा
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शोले की लपक भूल भी जाएँ!
हम शौक़ के शोले की लपक भूल भी जाएँ, वो शम-ए-फ़सुर्दा का धुआँ याद रहेगा| इब्न-ए-इंशा
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दर्द कि उट्ठा था यहाँ याद रहेगा!
वो टीस कि उभरी थी इधर याद रहेगी, वो दर्द कि उट्ठा था यहाँ याद रहेगा| इब्न-ए-इंशा
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वो कूचा वो मकाँ याद रहेगा!
उस शाम वो रुख़्सत का समाँ याद रहेगा, वो शहर वो कूचा वो मकाँ याद रहेगा| इब्न-ए-इंशा
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ओ मेरी जिंदगी!
एक बार फिर से मैं आज हिन्दी के अनूठे कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| आपातकाल में अपनी विद्रोही ग़ज़लों से उनको बहुत प्रसिद्धि प्राप्त हुई थी| दुष्यंत जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की यह कविता…