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क्षण भर को क्यों प्यार किया था!
आज मैं हिंदी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। बच्चन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय हरिवंश राय जी का यह गीत– क्षण भर को क्यों प्यार किया था? अर्द्ध रात्रि में सहसा उठकर,पलक संपुटों में मदिरा…
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आती रुत मुझे रोएगी!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में नासिर काज़मी जी की ग़ज़ल का अंतिम शेर जिसे ग़ुलाम अली जी ने गाया है- आती रुत मुझे रोएगी जाती रुत का झोंका हूँ! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******
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वो चाँदनी की बशारत है!
वो चाँदनी की बशारत है हर्फ़-ए-आख़िर तक,‘बशीर-बद्र’ को लाओ बड़ा अँधेरा है। बशीर बद्र
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तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह भजन- तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो, तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो !फिल्म- मैं चुप रहूंगी गीतकार- पारंपरिक भजन संगीतकार- चित्रगुप्त गायिका- लता मंगेशकर प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । ******
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काम करेगी उसकी धार!
आज मैं श्रेष्ठ उर्दू शायर स्वर्गीय हस्तीमल हस्ती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।हस्ती जी के कुछ शेर मैंने पहले भी शेयर किए हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय हस्तीमल हस्ती जी की यह ग़ज़ल – काम करेगी उसकी धारबाकी लोहा है बेकार कैसे बच सकता था मैंपीछे ठग थे आगे यार बोरी भर…
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उसे कहीं से बुलाओ!
ग़ज़ल में जिस की हमेशा चराग़ जलते हैं,उसे कहीं से बुलाओ बड़ा अँधेरा है। बशीर बद्र