Category: Uncategorized
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सामान में रक्खे रहे!
ज़िंदगी भर अपनी गूँगी धड़कनों के साथ साथ,हम भी घर के क़ीमती सामान में रक्खे रहे| राहत इंदौरी
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शाख़ से तोड़े गए!
सिर्फ़ इतना फ़ासला है ज़िंदगी से मौत का,शाख़ से तोड़े गए गुल-दान में रक्खे रहे| राहत इंदौरी
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जिंदगी भर मैं जिसे!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में नीरज जी की ग़ज़ल का अगला शेर- जिंदगी भर मैं जिसे देख के इतराता रहा! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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ख़्वाब कच्ची धूप थे!
बंद कमरे खोल कर सच्चाइयाँ रहने लगीं,ख़्वाब कच्ची धूप थे दालान में रक्खे रहे| राहत इंदौरी
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सुहानी चांदनी रातें!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह मनभावन गीत –मुक्ति फिल्म के लिए मुकेश जी का यह रोमांटिक गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था –सुहानी चांदनी रातें हमें सोने नहीं देतीं !फिल्म- मुक्तिमुख्य कलाकार- शशि कपूर, संजीव कुमार, विद्या सिन्हागीतकार- आनंद बक्षीसंगीतकार- राहुल देव बर्मनगायक- मुकेशप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है…
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मेरे दरवाज़े से अब चाँद को!
आज मैं श्रेष्ठ उर्दू शायर अली सरदार जाफ़री जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनके बहुत से शेर मैंने पहले शेयर किए हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय अली सरदार जाफ़री जी की यह नज़्म – मेरे दरवाज़े से अब चाँद को रुख़सत कर दोसाथ आया है तुम्हारे जो तुम्हारे घर सेअपने माथे से…
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जुगनुओं ने फिर अँधेरों से!
जुगनुओं ने फिर अँधेरों से लड़ाई जीत ली,चाँद सूरज घर के रौशन-दान में रक्खे रहे| राहत इंदौरी
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सिर्फ़ सच और झूट की!
सिर्फ़ सच और झूट की मीज़ान में रक्खे रहे,हम बहादुर थे मगर मैदान में रक्खे रहे| राहत इंदौरी
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मेरे होठों पे दुआ, उसकी जुबां पर गाली
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में गोपाल दास नीरज जी का एक और शेर- अशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद *****