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महँगाई के मौसम में ये!
ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से मैं शर्मिंदा बहुत हूँ,महँगाई के मौसम में ये त्यौहार पड़ा है| मुनव्वर राना
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अन्त के बाद-1
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इसी शीर्षक से उनकी दो कविताएं हैं पहली यहाँ प्रस्तुत है। वाजपेयी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – अन्त के बादहम चुपचाप नहीं…
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ओढ़े हुए उम्मीद की !
ओढ़े हुए उम्मीद की इक मैली सी चादर,दरवाज़ा-ए-बख़्शिश पे गुनहगार पड़ा है| मुनव्वर राना
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देख लो ये आज का!
तुम कहते थे दिन हो गए देखा नहीं उस को,लो देख लो ये आज का अख़बार पड़ा है| मुनव्वर राना
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क्या अजब है यही!
मेरे यूत्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में नीरज जी की ग़ज़ल का अंतिम शेर – क्या अजब है यही इंसान का दिल भी नीरज! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******
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आँखों का दो-आबा!
दिल में जो लहू-झील थी वो सूख चुकी है,आँखों का दो-आबा है सो बे-कार पड़ा है| मुनव्वर राना
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सब रौनक़-ए-सहरा थी!
सब रौनक़-ए-सहरा थी इसी पगले के दम से,उजड़ा हुआ दीवाने का दरबार पड़ा है| मुनव्वर राना
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दीवाना कई रोज़ से!
सहरा पे बुरा वक़्त मिरे यार पड़ा है,दीवाना कई रोज़ से बीमार पड़ा है| मुनव्वर राना
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वफ़ा जिनसे की बेवफ़ा हो गए!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह अमर गीत- वफ़ा जिनसे की बेवफ़ा हो गए वो वादे मोहब्बत के क्या हो गए!फिल्म- प्यार का सागर मुख्य कलाकार- राजेंद्र कुमार, मीना कुमारी गीतकार- प्रेम धवन संगीतकार- रवि गायक- मुकेश प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ****