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दुआ क्यूँ नहीं देते!
ख़ामोश हो क्यूँ दाद-ए-जफ़ा क्यूँ नहीं देते, बिस्मिल हो तो क़ातिल को दुआ क्यूँ नहीं देते| अहमद फ़राज़
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पराये मन की कौन सुने!
आज एक बार मैं विख्यात हिन्दी कवि स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत- पराये मन की कौन सुने?अपनी पीर सभी को प्यारी,पीर पराई क्या बेचारी;मुक्ति-मंत्र जग को रुचिकर,बंधन…
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और सिर्फ़ शाएर तू!
‘फ़राज़’ तू ने उसे मुश्किलों में डाल दिया, ज़माना साहब-ए-ज़र और सिर्फ़ शाएर तू| अहमद फ़राज़
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जो हो सके तो चला आ
फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ, जो हो सके तो चला आ किसी की ख़ातिर तू| अहमद फ़राज़
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दुनिया तुझे बदल देगी
मैं जानता हूँ कि दुनिया तुझे बदल देगी, मैं मानता हूँ कि ऐसा नहीं ब-ज़ाहिर तू| अहमद फ़राज़
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तिरा ख़याल कि!
मिरी मिसाल कि इक नख़्ल-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ, तिरा ख़याल कि शाख़-ए-चमन का ताइर तू | अहमद फ़राज़
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हुई है शाम तो!
हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू, कहाँ गया है मिरे शहर के मुसाफ़िर तू| अहमद फ़राज़
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दिल्लियाँ!
आज एक बार मैं विख्यात हिन्दी कवि स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की यह कविता- हाथी की नंगी पीठ परघुमाया गया दाराशिकोह को गली-गलीऔर दिल्ली चुप रही लोहू की…
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आइना देखा करो!
तैश में आने लगे तुम तो मिरी तन्क़ीद पर, इस क़दर हस्सास हो तो आइना देखा करो| मंज़र भोपाली