Category: Uncategorized
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चार दिन अवकाश
एक बार फिर मैं 26 से 29 जून तक ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म और फेसबुक आदि से दूर रहूँगा, और इस दौरान कोई नई पोस्ट नहीं डालूँगा|
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आओ मिल आएँ!
दो घड़ी आओ मिल आएँ किसी ‘ग़ालिब’ से ‘क़तील’, हज़रत-ए-‘ज़ौक़’ तो वाबस्ता हैं दरबार के साथ| क़तील शिफ़ाई
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दुश्मनी मुझसे किए जा
दुश्मनी मुझ से किए जा मगर अपना बन कर, जान ले ले मिरी सय्याद मगर प्यार के साथ| क़तील शिफ़ाई
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इक न इक ख़ौफ़ भी है
लफ़्ज़ चुनता हूँ तो मफ़्हूम* बदल जाता है, इक न इक ख़ौफ़ भी है जुरअत-ए-इज़हार के साथ| *Meaning क़तील शिफ़ाई
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ग़म-ए-यार के साथ!
किस तरह अपनी मोहब्बत की मैं तकमील करूँ, ग़म-ए-हस्ती भी तो शामिल है ग़म-ए-यार के साथ| क़तील शिफ़ाई
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दुश्मनी धूप की है!
ग़म लगे रहते हैं हर आन ख़ुशी के पीछे, दुश्मनी धूप की है साया-ए-दीवार के साथ| क़तील शिफ़ाई
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वक़्त की रफ़्तार!
राब्ता लाख सही क़ाफ़िला-सालार के साथ, हम को चलना है मगर वक़्त की रफ़्तार के साथ| क़तील शिफ़ाई
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इक दिन ऐसा भी आएगा!
आज एक बार मैं अपने समय के श्रेष्ठकवि और शायर स्वर्गीय बेकल उत्साही जी की एक नज़्म शेयर कर रहा हूँ| बेकल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बेकल उत्साही जी की यह नज़्म- इक दिन ऐसा भी आएगा होंठ-होंठ पैमाने होंगेमंदिर-मस्जिद कुछ नहीं होंगे घर-घर…
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वक़्त नहीं है बातों का!
ये वक़्त नहीं है बातों का पलकों के साए काम में ला, इल्हाम कोई इल्हाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है| क़तील शिफ़ाई