Category: Uncategorized
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मिरी हर नज़र थी इक
हुए मुझ से जिस घड़ी तुम जुदा तुम्हें याद हो कि न याद हो,मिरी हर नज़र थी इक इल्तिजा तुम्हें याद हो कि न याद हो| नज़ीर बनारसी
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भिक्षा!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के विख्यात कवि स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा नवीन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नवीन जी भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में भी सक्रिय रहे थे| नवीन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा नवीन जी की यह कविता –…
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किसी को दोस्त बनाते!
किसी से बात जो की है तो वो ख़फ़ा हैं ‘नज़ीर’,किसी को दोस्त बनाते तो और क्या करते| नज़ीर बनारसी
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अंधेरा माँगने आया था!
अंधेरा माँगने आया था रौशनी की भीक,हम अपना घर न जलाते तो और क्या करते| नज़ीर बनारसी
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अगर न बात बढ़ाते
हमें तो उस लब-ए-नाज़ुक को देनी थी ज़हमत,अगर न बात बढ़ाते तो और क्या करते| नज़ीर बनारसी
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बग़ैर इश्क़ अँधेरे में!
बग़ैर इश्क़ अँधेरे में थी तिरी दुनिया,चराग़-ए-दिल न जलाते तो और क्या करते| नज़ीर बनारसी
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उन्हें ख़ुदा न बनाते!
हम उन के दर पे न जाते तो और क्या करते,उन्हें ख़ुदा न बनाते तो और क्या करते| नज़ीर बनारसी
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मोह की नदी!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी नवगीत के अत्यंत वरिष्ठ एवं श्रेष्ठ हस्ताक्षर श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – दोने में धरे किसी दीप की तरहवक़्त…