Category: Uncategorized
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देखी केवल भीड़ और!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। सरोज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की यह कविता – शायद तुमने, दुनिया को, देखा ही नहीं क़रीब सेइसीलिए बातें…
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दामन-ए-दर्द को!
दामन-ए-दर्द को गुलज़ार बना रक्खा है,आओ इक दिन दिल-ए-पुर-ख़ूँ का हुनर तो देखो| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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उनका जिगर तो देखो!
वो जो अब चाक गरेबाँ भी नहीं करते हैं,देखने वालो कभी उन का जिगर तो देखो| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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इक नज़र तुम मिरा!
वो तो वो है तुम्हें हो जाएगी उल्फ़त मुझ से,इक नज़र तुम मिरा महबूब-ए-नज़र तो देखो| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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गुल खिले जाते हैं वो!
गर्मी-ऐ-शौक़-ऐ-नज़ारा का असर तो देखो,गुल खिले जाते हैं वो साया-ए-तर तो देखो| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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कुछ अपने दिल की!
कुछ अपने दिल की ख़ू का भी शुक्राना चाहिए,सौ बार उन की ख़ू का गिला कर चुके हैं हम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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फीका है अब भी रंग!
उन की नज़र में क्या करें फीका है अब भी रंग,जितना लहू था सर्फ़-ए-क़बा कर चुके हैं हम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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खांटी घरेलू औरत!
आज मैं एक श्रेष्ठ हिंदी उपन्यास लेखिका सुश्री ममता कालिया जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। ममता जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री ममता कालिया जी की यह कविता – 1.कभी कोई ऊंची बात नहीं सोचतीखांटी घरेलू औरतउसका दिन कतर-ब्योंत में बीत जाता हैऔर रात…
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अब अपना इख़्तियार!
अब अपना इख़्तियार है चाहे जहाँ चलें, रहबर से अपनी राह जुदा कर चुके हैं हम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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देखें है कौन कौन!
देखें है कौन कौन ज़रूरत नहीं रही, कू-ए-सितम में सब को ख़फ़ा कर चुके हैं हम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़