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इतना प्यार न देना मुझको!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय मधुर शास्त्री जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। मधुर शास्त्री जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मधुर शास्त्री जी का यह गीत – इतना प्यार न देना मुझको दुःख के बोल न मैं सुन पाऊँ यों मेरे जीवन…
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यूँही मर मर के जिएँ!
यूँही मर मर के जिएँ वक़्त गुज़ारे जाएँ,ज़िंदगी हम तिरे हाथों से न मारे जाएँ| अहमद फ़राज़
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सिलसिला टूटा नहीं है!
जिस को भी चाहा उसे शिद्दत से चाहा है ‘फ़राज़’,सिलसिला टूटा नहीं है दर्द की ज़ंजीर का| अहमद फ़राज़
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कि है तेरे बग़ैर!
जाने किस आलम में तू बिछड़ा कि है तेरे बग़ैर,आज तक हर नक़्श फ़रियादी मिरी तहरीर का| अहमद फ़राज़
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मैं ने ये आलम भी!
जिस तरह बादल का साया प्यास भड़काता रहे,मैं ने ये आलम भी देखा है तिरी तस्वीर का| अहमद फ़राज़
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कैसे पाया था तुझे!
कैसे पाया था तुझे फिर किस तरह खोया तुझे,मुझ सा मुंकिर भी तो क़ाएल हो गया तक़दीर का| अहमद फ़राज़
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ख़्वाब क्या देखा कि!
रात क्या सोए कि बाक़ी उम्र की नींद उड़ गई,ख़्वाब क्या देखा कि धड़का लग गया ताबीर का| अहमद फ़राज़
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होने लगा तस्वीर का!
मुंतज़िर कब से तहय्युर है तिरी तक़रीर का,बात कर तुझ पर गुमाँ होने लगा तस्वीर का| अहमद फ़राज़