Category: Uncategorized
-
बहाने आ जाते हैं!
हम भी ‘मुनीर’ अब दुनिया-दारी कर के वक़्त गुज़ारेंगे,होते होते जीने के भी लाख बहाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी
-
कैसे हैं वो लोग जिन्हें!
ज़े के रेशमी रुमालों को किस किस की नज़रों से छुपाएँ,कैसे हैं वो लोग जिन्हें ये राज़ छुपाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी