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रंगीनियों में डूब गया!
अल्लाह-री जिस्म-ए-यार की ख़ूबी कि ख़ुद-ब-ख़ुद,रंगीनियों में डूब गया पैरहन तमाम| हसरत मोहानी
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दिल ने भी तेरे सीख!
हैरत ग़ुरूर-ए-हुस्न से शोख़ी से इज़्तिराब,दिल ने भी तेरे सीख लिए हैं चलन तमाम| हसरत मोहानी
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सर्दी आज ग़ज़ब की!
मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर,बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है। शहरयार
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पंछी में गाने का गुन!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रवींद्र भ्रमर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। भ्रमर जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवींद्र भ्रमर जी की यह कविता – पँछी में गाने का गुन हैदो तिनके चुनकरवह तृप्त जहाँ होता हैगीतों की कड़ियाँबोता है !सूखा पेड़कँटीली टहनीबियाबान,…
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गर्दिश-ए-वक़्त का!
गर्दिश-ए-वक़्त का कितना बड़ा एहसाँ है कि आज,ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें। शहरयार