Category: Uncategorized
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धूल के सिवा क्या है!
शिकस्ता ख़्वाब के मलबे में ढूँढता क्या है,खंडर खंडर है यहाँ धूल के सिवा क्या है| क़ैसर शमीम
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अरे, अब ऐसी कविता लिखो!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी संपादक और कवि स्वर्गीय रघुवीर सहाय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। रघुवीर सहाय जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रघुवीर सहाय जी की यह कविता – अरे, अब ऐसी कविता लिखोकि जिसमें छन्द घूमकर आयघुमड़ता जाय देह में दर्दकहीं…
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ज़ाग़ ओ ज़ग़न तमाम!
समझे हैं अहल-ए-शर्क़ को शायद क़रीब-ए-मर्ग,मग़रिब के यूँ हैं जम्अ’ ये ज़ाग़ ओ ज़ग़न तमाम| हसरत मोहानी
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किए जाएँ सख़्तियाँ!
अच्छा है अहल-ए-जौर किए जाएँ सख़्तियाँ,फैलेगी यूँ ही शोरिश-ए-हुब्ब-ए-वतन तमाम| हसरत मोहानी
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गुलज़ार बन गई है!
उस नाज़नीं ने जब से किया है वहाँ क़याम,गुलज़ार बन गई है ज़मीन-ए-दकन तमाम| हसरत मोहानी
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घेर लिया है चमन!
नश्व-ओ-नुमा-ए-सब्ज़ा-ओ-गुल से बहार में,शादाबियों ने घेर लिया है चमन तमाम| हसरत मोहानी
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लबरेज़ आब-ए-नूर!
है नाज़-ए-हुस्न से जो फ़रोज़ाँ जबीन-ए-यार,लबरेज़ आब-ए-नूर है चाह-ए-ज़क़न तमाम| हसरत मोहानी
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बेहोश इक नज़र में!
देखो तो चश्म-ए-यार की जादू-निगाहियाँ,बेहोश इक नज़र में हुई अंजुमन तमाम| हसरत मोहानी
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ऐसे क्षण आए जीवन में!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। सिंदूर जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का यह गीत – ऐसे क्षण आए जीवन में, माटी कंचन लगे!नयन रह जायें ठगे-ठगे! तन लहराये अगरु गन्ध-सामन लहरे किसलय-सा,हर…
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दिल ख़ून हो चुका है!
दिल ख़ून हो चुका है जिगर हो चुका है ख़ाक, बाक़ी हूँ मैं मुझे भी कर ऐ तेग़-ज़न तमाम| हसरत मोहानी