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फालतू चीज़!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि श्री विष्णु नागर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नागर जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री विष्णु नागर जी की यह कविता – घर में कोई चीज़फालतू नहीं थीटूटा कंघा लगता थाअमर हैभरोसा था अब खोएगा भी नहीं…
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अब के चराग़ों ने!
अब के चराग़ों ने चौंकाया दुनिया को,आँधी आख़िर में झुँझला कर बैठ गई| इरशाद ख़ान सिकंदर
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गुड़ियों का अम्बार!
बूढ़ी माँ का शायद लौट आया बचपन,गुड़ियों का अम्बार लगा कर बैठ गई| इरशाद ख़ान सिकंदर
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दुनिया तो अफ़्वाह!
खोज रहा है आज भी वो गूलर का फूल,दुनिया तो अफ़्वाह उड़ा कर बैठ गई| इरशाद ख़ान सिकंदर
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संगीत के लिए कुछ छंद
आज एक बार फिर से पुरानी पोस्ट दोहरा रहा हूँ। आज अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। (अनुवाद हेतु मूल रचनाएं मैं सामान्यतः ‘Poemhunter.com’ से लेता हूँ।) पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- संगीत के लिए…