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ज़रा सी कम तो हुई है!
उजाला तो नहीं कह सकते इस को हम लेकिन,ज़रा सी कम तो हुई है ये तीरगी देखो| जावेद अख़्तर
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जो दूर जाए तो ग़म!
जो दूर जाए तो ग़म है जो पास आए तो दर्द,न जाने क्या है वो कम्बख़्त आदमी देखो| जावेद अख़्तर
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जो मेरी मोहब्बत!
जो हो सके तो ज़ियादा ही चाहना मुझ को,कभी जो मेरी मोहब्बत में कुछ कमी देखो| जावेद अख़्तर
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मोहब्बतों में कहाँ!
मोहब्बतों में कहाँ अपने वास्ते फ़ुर्सत,जिसे भी चाहे वो चाहे मिरी ख़ुशी देखो| जावेद अख़्तर
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कहाँ पे लाई है तुमको!
जब आईना कोई देखो इक अजनबी देखो,कहाँ पे लाई है तुम को ये ज़िंदगी देखो| जावेद अख़्तर
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शब्द और शब्द!
आज मैं हिंदी के महान कथाकार और कवि स्वर्गीय विष्णु प्रभाकर जी की दो कविताएं शेयर कर रहा हूँ। विष्णु जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री विष्णु प्रभाकर जी की यह कविता – एक समा जाता हैश्वास में श्वासशेष रहता हैफिर कुछ नहींइस अनंत आकाश मेंशब्द…