Category: Uncategorized
-
ये रास्ता कोई और है!
कभी लौट आएँ तो पूछना नहीं देखना उन्हें ग़ौर से,जिन्हें रास्ते में ख़बर हुई कि ये रास्ता कोई और है| सलीम कौसर
-
ऐ मेरे वतन के लोगो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में लता मंगेशकर जी का गाया कवि प्रदीप जी का लिखा प्रसिद्ध देशभक्तिपूर्ण गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जो लता जी ने चीन से युद्ध में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि स्वरूप गाया था – ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी…
-
मिरा जुर्म तो कोई और था!
वही मुंसिफ़ों की रिवायतें वही फ़ैसलों की इबारतें,मिरा जुर्म तो कोई और था प मिरी सज़ा कोई और है| सलीम कौसर
-
प्रार्थना की कड़ी!
आज श्रेष्ठ हिंदी साहित्यकार और संपादक स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।भारती जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की यह कविता– प्रार्थना की एक अनदेखी कड़ीबाँध देती है, तुम्हारा मन, हमारा मन,फिर किसी अनजान आशीर्वाद में-डूबकरमिलती मुझे राहत…
-
तिरी दास्ताँ कोई और थी!
तुझे दुश्मनों की ख़बर न थी मुझे दोस्तों का पता नहीं,तिरी दास्ताँ कोई और थी मिरा वाक़िआ कोई और है| सलीम कौसर
-
वही है या कोई और है!
मिरी रौशनी तिरे ख़द्द-ओ-ख़ाल से मुख़्तलिफ़ तो नहीं मगर,तू क़रीब आ तुझे देख लूँ तू वही है या कोई और है| सलीम कौसर
-
क़तरे से समंदर तक!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में श्री सोम ठाकुर जी का यह मुक्तक प्रस्तुत कर रहा हूँ-क़तरे से समंदर तक गुमनाम सिलसिला हूँ! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
-
मुझे जानता कोई और है!
अजब ए’तिबार ओ बे-ए’तिबारी के दरमियान है ज़िंदगी,मैं क़रीब हूँ किसी और के मुझे जानता कोई और है| सलीम कौसर
-
मुझे माँगता कोई और है!
मैं किसी के दस्त-ए-तलब में हूँ तो किसी के हर्फ़-ए-दुआ में हूँ,मैं नसीब हूँ किसी और का मुझे माँगता कोई और है| सलीम कौसर
-
ओ मेरे सोना रे!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में ‘तीसरी मंज़िल’ फिल्म का गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मोहम्मद रफी जी और आशा भोसले जी ने गाया था- ओ मेरे सोना रे, सोना रे, सोना रे! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******