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क्या बतलाएं हमने कैसे!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्री सोम ठाकुर जी की एक ग़ज़ल के दो शेर अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ-क्या बतलाएं हमने कैसे सांझ-सवेरे देखे हैं! आशा है आपको ये पसंद आएंगे,धन्यवाद। *****
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बरसा जो अब के अब्र!
पिछले बरस हवेली हमारी खंडर हुई,बरसा जो अब के अब्र तो समझो खंडर गया| शीन काफ़ निज़ाम
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सूरज ही वो नहीं है!
निकली है फ़ाल अब के अजब मेरे नाम की,सूरज ही वो नहीं है जो ढलने से डर गया| शीन काफ़ निज़ाम
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यूं हसरतों के दाग!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म-‘अदालत’ के लिए लता मंगेशकर जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे राजेंद्र कृष्ण जी ने लिखा था और इसका संगीत मदन मोहन जी ने दिया था – यूं हसरतों के दाग मोहब्बत में धो लिए, खुद दिल से दिल की बात…
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सितारों से भर गया!
आँसू मिरे तो मेरे ही दामन में आए थे,आकाश कैसे इतने सितारों से भर गया| शीन काफ़ निज़ाम
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क्यूँ छोड़ कर गया!
इस फ़िक्र ही में अपनी तो गुज़री तमाम उम्र,मैं उस को था पसंद तो क्यूँ छोड़ कर गया| शीन काफ़ निज़ाम
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इतना ज्यादा मत हंसना मेरे मन!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्री सोम ठाकुर जी का यह मुक्तक शेयर कर रहा हूँ- इतना ज्यादा मत हंसना मेरे मन! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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आँखों में रात ख़्वाब का!
आँखों में रात ख़्वाब का ख़ंजर उतर गया,यानी सहर से पहले चराग़-ए-सहर गया| शीन काफ़ निज़ाम