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जाते जाते उसका वो!
यूँ बिछड़ना भी बहुत आसाँ न था उस से मगर,जाते जाते उस का वो मुड़ कर दोबारा देखना| परवीन शाकिर
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मैं समुंदर देखती हूँ !
बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना,मैं समुंदर देखती हूँ तुम किनारा देखना| परवीन शाकिर
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जै गणेश देवा!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है एक छोटी सी हास्य कविता- आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। ******
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अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में श्री सुदर्शन फाकिर जी की यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जग्जीत सिंह-चित्रा सिंह ने बहुत खूबसूरत तरीके से गाया है- अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें,हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें! आशा है आपको यह प्रस्तुति पसंद आएगी,धन्यवाद । *****
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गीत उगने दो
आज फिर से मेरी एक पुरानी रचना प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- मौन यूं कवि मत रहो,अब गीत उगने दो। अनुभव की दुनिया केअनगिनत पड़ाव,आसपास से गुज़र गए,झोली में भरे कभीपर फिर अनजाने में,सभी पत्र-पुष्प झर गए,करके निर्बंध, पिपासे मानव-मन को-अनुभव-संवेदन दाना चुगने दो। खुद से खुद की बातेंकरने से क्या होगा,सबसे, सबकी…