Category: Uncategorized
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दरिया की रवानी देना!
कश्तियाँ देना मगर इज़्न-ए-सफ़र से पहले,ठहरे पानी को भी दरिया की रवानी देना| क़ैसर शमीम
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धूप इतनी कराहती क्यों है!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में राहत इंदौरी जी का एक और शेर-धूप इतनी कराहती क्यों है! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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मिरी आँखों को अगर!
पोंछ लेना मिरी पलकों से लहू की बूँदें,मिरी आँखों को अगर मंज़र-ए-सानी देना| क़ैसर शमीम
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कुछ भी तो अब!
आज मैं श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय नईम जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नईम जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नईम जी का यह नवगीत- कुछ भी तो अबतन्त नहीं है-ऊपरवाले की लाठी में। दीमक चाट गयी है शायद-ये भी ऊपरवाला जाने,भुस में तिनगी जिसने…
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श्रेष्ठ गीतों की मेरी यूट्यूब लाइव प्रस्तुति
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपनी लाइव प्रस्तुति शेयर कर रहा हूँ जिसमें मैंने नीरज जी, शैलेंद्र जी, कुंवर बेचैन जी, किशन सरोज जी और इंदुमती कौशिक जी की श्रेष्ठ रचनाओं को अपने स्वर में प्रस्तुत किया है- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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रोज हम एक अंधेरी धुंध के पार!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में राहत इंदौरी जी का एक और शेर –रोज हम एक अंधेरी धुंध के पार! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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कैसी रुतों की सर्द हवा!
आँखों की चमक मौहूम हुई लौ देते बदन अफ़्सुर्दा हुए,दर आई है ‘क़ैसर’ घर में मिरे ये कैसी रुतों की सर्द हवा| क़ैसर शमीम
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जो खेल भी चाहे खेले मगर!
आई है घने जंगल में अभी जो खेल भी चाहे खेले मगर,कल मेरे साथ उड़ाएगी फिर सहरा सहरा गर्द हवा| क़ैसर शमीम