क़तरे से समंदर तक!

अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में श्री सोम ठाकुर जी का यह मुक्तक प्रस्तुत कर रहा हूँ-
क़तरे से समंदर तक गुमनाम सिलसिला हूँ!

आशा है आपको यह पसंद आएगा,
धन्यवाद।
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