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एक उम्र मुस्कान की!
आज फिर से मैं अपने अत्यंत प्रिय नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक सुंदर गीत शेयर कर रहा हूँ| रंजक जी के बहुत से गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं और उनके बारे में काफी लिखा भी है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक सुंदर गीत – इतनी ही…
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भीड़ में भी जाए तो तन्हा दिखाई दे!
क्या हुस्न है जमाल है क्या रंग-रूप है, वो भीड़ में भी जाए तो तन्हा दिखाई दे| कृष्ण बिहारी नूर
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अजीब शर्त है दीदार के लिए!
कैसी अजीब शर्त है दीदार के लिए, आँखें जो बंद हों तो वो जल्वा दिखाई दे| कृष्ण बिहारी नूर
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ख़्वाब में दरिया दिखाई दे!
उस तिश्ना-लब के नींद न टूटे दुआ करो, जिस तिश्ना-लब को ख़्वाब में दरिया दिखाई दे| कृष्ण बिहारी नूर
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अक्स न उसका दिखाई दे!
क्यूँ आईना कहें उसे पत्थर न क्यूँ कहें, जिस आईने में अक्स न उसका दिखाई दे| कृष्ण बिहारी नूर
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जिसमें कि दरिया दिखाई दे!
दरिया में यूँ तो होते हैं क़तरे ही क़तरे सब, क़तरा वही है जिसमें कि दरिया दिखाई दे| कृष्ण बिहारी नूर
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जाम छलकता दिखाई दे!
वो लब कि जैसे साग़र-ए-सहबा दिखाई दे, जुम्बिश जो हो तो जाम छलकता दिखाई दे| कृष्ण बिहारी नूर
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कड़वे आचमन के बाद!
आज एक बार फिर से मैं अपने एक अत्यंत प्रिय गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी के बहुत से गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं और उनके बारे में भी काफी कुछ लिखा है, इसलिए आज सीधे उनका यह सुंदर गीत शेयर कर रहा हूँ| आज…
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कोई भी फूल मुरझाया न था!
सिर्फ़ ख़ुश्बू की कमी थी ग़ौर के क़ाबिल ‘क़तील’, वर्ना गुलशन में कोई भी फूल मुरझाया न था| क़तील शिफ़ाई
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झोंकों के पीछे चल रही थीं आँधियाँ!
अब खुला झोंकों के पीछे चल रही थीं आँधियाँ, अब जो मंज़र है वो पहले तो नज़र आया न था| क़तील शिफ़ाई