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वज़न है सम्भलके उठाना!
ये तन्हाईयाँ, याद भी, चान्दनी भी,गज़ब का वज़न है सम्भलके उठाना। कन्हैयालाल नंदन
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मुहब्बत है या कारखाना!
अभी मुझसे, फिर आपसे फिर और किसी से,मियाँ ये मुहब्बत है या कारखाना। कन्हैयालाल नंदन
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जानलेवा है ये दरमियाना!
मुझे वो मिलेगा ये मुझको यकीं है,बड़ा जानलेवा है ये दरमियाना| कन्हैयालाल नंदन
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दो घूँट पानी पिलाना!
नदी की कहानी कभी फिर सुनाना,मैं प्यासा हूँ दो घूँट पानी पिलाना। कन्हैयालाल नंदन
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उजाले की खुशबू
एक बार फिर से मैं कवि सम्मेलनों में अपने गीतों के माध्यम से श्रोताओं के मन में अपनी अमिट छाप बनाने वाले सृजनधर्मी गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी ने अपने गीतों में अभिव्यक्ति की बहुत मंज़िलें पार की हैं, सरल भाषा में अक्सर बहुत गहरी बात…
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कुछ अपनी अय्यारी है!
औरों जैसे होकर भी हम बाइज़्ज़त हैं बस्ती में,कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है| निदा फ़ाज़ली
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बहुत बड़ी फ़नकारी है!
मन बैरागी, तन अनुरागी, क़दम-क़दम दुश्वारी है,जीवन जीना सहल न जानो, बहुत बड़ी फ़नकारी है| निदा फ़ाज़ली
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अपनी उड़ान में रखना!
चमकते चाँद-सितारों का क्या भरोसा है,ज़मीं की धूल भी अपनी उड़ान में रखना | निदा फ़ाज़ली