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तुलना!
लंबे समय के बाद आज मैं स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक और सुंदर कविता शेयर कर रहा हूँ| दुष्यंत जी आपातकाल में प्रकाशित अपने ग़ज़ल संग्रह ‘साए में धूप’ के कारण बहुत प्रसिद्ध हो गए थे, मैंने शुरू में उनकी ग़ज़लें शेयर की थीं लेकिन कई बार से मैं उनकी अन्य कविताएं शेयर कर…
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जब भी हम ख़ानुमाँ-ख़राब आए!
जल उठे बज़्म-ए-ग़ैर के दर-ओ-बाम, जब भी हम ख़ानुमाँ-ख़राब आए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़