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लुत्फ़ के मौक़े पे तुझे याद किया!
मेरी हर साँस है इस बात की शाहिद ऐ मौत, मैंने हर लुत्फ़ के मौक़े पे तुझे याद किया| जोश मलीहाबादी
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मुझसे कुछ इरशाद किया!
इतना मानूस हूँ फ़ितरत से कली जब चटकी, झुक के मैंने ये कहा मुझसे कुछ इरशाद किया| जोश मलीहाबादी
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बहुत देर में बर्बाद किया!
इसका रोना नहीं क्यूँ तुम ने किया दिल बर्बाद, इसका ग़म है कि बहुत देर में बर्बाद किया| जोश मलीहाबादी
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क्या आपने इरशाद किया!
ऐ मैं सौ जान से इस तर्ज़-ए-तकल्लुम के निसार, फिर तो फ़रमाइए क्या आपने इरशाद किया| जोश मलीहाबादी
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चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया!
दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया, जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया| जोश मलीहाबादी
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निगह-ए-लुत्फ़ ने बर्बाद किया!
वो करें भी तो किन अल्फ़ाज़ में तेरा शिकवा, जिनको तेरी निगह-ए-लुत्फ़ ने बर्बाद किया| जोश मलीहाबादी
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दहर से आज़ाद किया!
सोज़-ए-ग़म दे के मुझे उसने ये इरशाद किया, जा तुझे कशमकश-ए-दहर से आज़ाद किया| जोश मलीहाबादी
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वंदना!
एक बार फिर मैं आज हिन्दीदेश के राष्ट्रकवि के रूप में जाने गए, स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी का एक सुंदर वंदना गीत शेयर कर रहा हूँ|, स्वर्गीय द्विवेदी जी ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन तथा गांधी जी के बारे में अनेक महत्वपूर्ण कविताएं लिखी थीं, मैंने उनकी बहुत सी कविताएं पहले भी शेयर की हैं,…
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तुझसे कहा ना बहुत हुआ!
लो फिर तिरे लबों पे उसी बेवफ़ा का ज़िक्र, अहमद-‘फ़राज़’ तुझसे कहा ना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़
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तेरा ठिकाना बहुत हुआ!
क्या क्या न हम ख़राब हुए हैं मगर ये दिल, ऐ याद-ए-यार तेरा ठिकाना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़