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ये दर्द जागता क्यूँ है!
कहानियों की गुज़रगाह पर भी नींद नहीं, ये रात कैसी है ये दर्द जागता क्यूँ है | राही मासूम रज़ा
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जीने का हौसला क्यूँ है!
जो दूर दूर नहीं कोई दिल की राहों पर, तो इस मरीज़ में जीने का हौसला क्यूँ है| राही मासूम रज़ा
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इतना फ़ासला क्यूँ है!
सवाल कर दिया तिश्ना-लबी ने साग़र से, मेरी तलब से तिरा इतना फ़ासला क्यूँ है| राही मासूम रज़ा
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आख़िर ग़ुबार सा क्यूँ है!
दिलों की राह पर आख़िर ग़ुबार सा क्यूँ है, थका थका मेरी मंज़िल का रास्ता क्यूँ है| राही मासूम रज़ा
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झर गये पात!
लंबे समय के बाद आज एक बार फिर मैं स्वर्गीय बालकवि बैरागी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| बैरागी जी ने अत्यंत गरीबी की स्थिति से अपना जीवन प्रारंभ किया था और अपने परिश्रम के बल पर वे एक सांसद बने और संसदीय राजभाषा समिति के सदस्य भी बने| मैंने दिल्ली में रहते…