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उफ़ुक़ पिघलता दिखाई पड़ता है!
जां निसार अख़्तर साहब एक प्रसिद्ध भारतीय शायर थे और फिल्मों के लिए भी उन्होंने अनेक प्रसिद्ध गीत लिखे हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है जां निसार अख़्तर साहब की लिखी यह ग़ज़ल – उफ़ुक़ अगरचे पिघलता दिखाई पड़ता हैमुझे तो दूर सवेरा दिखाई पड़ता है हमारे शहर में बे-चेहरा लोग बसते हैंकभी-कभी कोई चेहरा दिखाई…
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दिखाने का तड़पना नहीं आता!
दुख जाता है जब दिल तो उबल पड़ते हैं आँसू,‘मुल्ला’ को दिखाने का तड़पना नहीं आता| आनंद नारायण मुल्ला
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जिन्हें नाम भी अपना नहीं आता!
भूले थे उन्हीं के लिए दुनिया को कभी हम,अब याद जिन्हें नाम भी अपना नहीं आता| आनंद नारायण मुल्ला
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ख़ताओं पे पनपना नहीं आता!
ज़ाहिद से ख़ताओं में तो निकलूँगा न कुछ कम,हाँ मुझको ख़ताओं पे पनपना नहीं आता| आनंद नारायण मुल्ला
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कहोगे के तड़पना नहीं आता!
तुम अपने कलेजे पे ज़रा हाथ तो रक्खो,क्यूँ अब भी कहोगे के तड़पना नहीं आता| आनंद नारायण मुल्ला
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नाम तुम्हारा मुझे जपना नहीं आता!
ये अश्क-ए-मुसलसल हैं महज़ अश्क-ए-मुसलसल,हाँ नाम तुम्हारा मुझे जपना नहीं आता| आनंद नारायण मुल्ला
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इस आँच में तपना नहीं आता!
दिल को सर-ए-उल्फ़त भी है रुसवाई का डर भी,उसको अभी इस आँच में तपना नहीं आता| आनंद नारायण मुल्ला
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दुनिया में पनपना नहीं आता!
भूले से भी लब पर सुख़न अपना नहीं आता,हाँ हाँ मुझे दुनिया में पनपना नहीं आता| आनंद नारायण मुल्ला
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अलाव!
प्रसिद्ध शायर और फिल्मी गीतकार गुलज़ार साहब की एक नज़्म आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| गुलज़ार साहब अपनी शायरी और फिल्मी गीतों में भी नए-नए प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं| गुलज़ार साहब के लिखे गीत, ग़ज़ल और नज़्में अपना अलग ही मुकाम रखती हैं, एक अलग पहचान उन्होंने हर क्षेत्र में बनाई है|…