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एक शख़्स नया देखता हूँ मैं!
किस-किसका नाम लाऊँ ज़बाँ पर कि तेरे साथ,हर रोज़ एक शख़्स नया देखता हूँ मैं| क़तील शिफ़ाई
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बदन की क़ब्र में कब से गड़ा हूँ मैं!
मैं ख़ुदकशी के जुर्म का करता हूँ ऐतराफ़,अपने बदन की क़ब्र में कब से गड़ा हूँ मैं| क़तील शिफ़ाई
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महफ़िलों में तुझे ढूँढता हूँ मैं!
बिखरा पड़ा है तेरे ही घर में तेरा वजूद,बेकार महफ़िलों में तुझे ढूँढता हूँ मैं| क़तील शिफ़ाई
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अब तेरा क्या हूँ मैं!
सदमा तो है मुझे भी कि तुझसे जुदा हूँ मैं,लेकिन ये सोचता हूँ कि अब तेरा क्या हूँ मैं| क़तील शिफ़ाई
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हम भी सो ही जायेंगे!
हमें भी नींद आ जायेगी हम भी सो ही जायेंगे,अभी कुछ बेक़रारी है सितारों तुम तो सो जाओ| क़तील शिफ़ाई
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सितारों तुम तो सो जाओ!
परेशाँ रात सारी है सितारों तुम तो सो जाओ,सुकूत-ए-मर्ग तारी है सितारों तुम तो सो जाओ| क़तील शिफ़ाई
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उस दिन!
हिन्दी फिल्म जगत में मेरे जो प्रिय गीतकार रहे हैं उनमें शैलेन्द्र जी का प्रमुख स्थान है, मैंने शैलेन्द्र जी की कई फिल्मी और गैर फिल्मी रचनाएं पहले भी शेयर की हैं, मैं उनको हिन्दी फिल्मों का जनकवि भी कहता हूँ| शैलेन्द्र जी का मेरे प्रिय नायक, निर्माता-निर्देशक राजकपूर जी के साथ भी अटूट संबंध…
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अपनी ही किसी बात पे रोना आया!
कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त, सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया| साहिर लुधियानवी
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आज ये किस बात पे रोना आया!
हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको, क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया| साहिर लुधियानवी
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हर इक बात पे रोना आया!
कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया, बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया| साहिर लुधियानवी