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पचास साल का इंसान!
आज एक बार फिर मैं देश में हिन्दी के एक वरिष्ठ हास्य-व्यंग्य कवि और कुशल मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता, जिसमें पचास वर्ष के व्यक्ति…
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सूरत-नुमा होता तो क्या होता!
ख़ुदा को भूलकर इंसान के दिल का ये आलम है, ये आईना अगर सूरत-नुमा होता तो क्या होता| चकबस्त बृज नारायण